Pyara Kerketta Foundation


कालातीत कहानियां

आदिवासी कहानियों के फिर से पढ़ने और सुनने का एक अनूठा मासिक कार्यक्रम

Timeless Adivasi Tales

कालातीत कहानियां

यह एक मासिक कार्यक्रम होगा जिसमें हम पहले किसी एक पुरानी किताब के कुछ चयनित अंश और एक नई किताब के अंश का पाठ करेंगे और फिर उस पर सामूहिक चर्चा करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी समाज में पुस्तकों, पुस्तकालयों और साहित्य तथा साहित्यिक आलोचना के प्रति उत्साह का माहौल बनाना है।

आदिवासी समाज पारंपरिक रूप से वाचिक समाज रहा है। कहानियां कहना और सुनना आदिवासियों का नैसर्गिक स्वभाव है। इस अर्थ में पढ़ना और लिखना उनके लिए रुचिकर काम नहीं है। फिर भी उन्होंने उन्नीसवीं-बीसवीं सदी के औपनिवेशिक दिनों में पढ़ना-लिखना सीखा। लेकिन इक्कीसवीं सदी में सूचना और संचार के नये-नये तकनीकों के आ जाने से पुस्तकों को पढ़ने की आदत में भारी बदलाव आया है। इस बदलाव से आदिवासी भी नहीं बचे हैं और उनमें भी पुस्तकों के प्रति रुचि कम हुई है। यह कार्यक्रम कहने-सुनने की वाचिक परंपरा का उपयोग करते हुए पुस्तकों के प्रति रुचि बढ़ाने और आदिवासी समाज में पढ़ने का माहौल विकसित करने के लिए है। इस अनूठे कार्यक्रम की शुरुआत 2019 की जनवरी से होने जा रही है।


उद्देश्य

टीवी, इंटरनेट और मोबाइल जैसे नये तकनीकों के आगमन ने शब्द, दृश्य, कहने-सुनने, देखने-पढ़ने और आपसी संवाद के परंपरागत तौर-तरीकों को बहुत हद तक प्रभावित किया है। विशेषकर किताबों को पढ़ने और उस पर सामूहिक चर्चा-परिचर्चा की गतिविधियां सीमित हुई हैं। पुस्तकालय और पुस्तकों के प्रति जो रुचि पहले हुआ करती थी उसमें भी चिंताजनक कमी आई है। आदिवासी समाज जो बीसवीं सदी की शुरुआत में पुस्तकों की दुनिया में आया है उसके लिए यह स्थिति अच्छी नहीं है। जबकि पुस्तकों और पुस्तकालयों की जरूरत उसे सबसे ज्यादा है। इसीलिए हमने इस कार्यक्रम की परिकल्पना की है। जिसे हम जनवरी 2019 से शुरू करने जा रहे हैं। यह एक मासिक कार्यक्रम होगा जिसमें हम पहले एक पुरानी किताब और एक नई किताब के कुछ अंशों का पाठ और फिर उस पर सामूहिक चर्चा करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य पुस्तकों और पुस्तकालयों के प्रति तथा साहित्य और साहित्यिक आलोचना के प्रति आदिवासी समाज में उत्साह का वातावरण निर्मित करना है।


कार्यक्रम की रूपरेखा

कार्यक्रम महीने के प्रत्येक चौथे रविवार को अपराह्न 3 से 5 बजे आयोजित करने की योजना है। इसमें हम मुख्यतः दो किताबों (एक नई और एक पुरानी) के कुछ चयनित अंशों का पाठ और फिर उस पर सामूहिक रूप से चर्चा करेंगे। कार्यक्रम में शामिल लोगों में से 20 लोग ऐसे होंगे जिन्हें हम महीने की शुरुआत में ही पाठ और चर्चा के लिय चयनित पुस्तकें उपलब्ध करा देंगे ताकि वे उसे पढ़कर आएं। चयनित पुस्तक कविता, कहानी, ललित लेख आदि किसी भी विधा की हो सकती है। नई पुस्तक के लेखक और यदि पुरानी पुस्तक के लेखक भी जीवित हों तो उन्हें भी कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाएगा जिससे पाठकों का उनसे सीधा संवाद हो सके। इस कार्यक्रम में हम शहर के पुस्तकालयों के प्रतिनिधि को भी आमंत्रित करेंगे जो उन्हें अपाने पुस्तकालय और वहां उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देंगे।

पहला कार्यक्रम 27 जनवरी 2019 को अखड़ा कार्यालय, रांची में अपराह्न 3 बजे से आयोजित होगा।


Timeless Adivasi Tales

27 जनवरी 2019 के लिए किताबें

UPCOMING EVENTS

Beyond The Jungle

Adivasi Memoirs Beyond The Jungle

On the completion of 50 years of the publication of India's first Adivasi autobiography 'Beyond the Jungle' written by Sita Rathnamal in 1968, we are going to organize a one-day national seminar in Ranchi (Jharkhand) on November 11, 2018. The title of the seminar is 'Adivasi Storytelling Beyond The Jungle'. This is the first literary event of its kind on Adivasi autobiographies and memoirs in which all of you are all cordially invited.

Adivasi Film Festival 2019

VISUAL STORYTELLERS FESTIVAL 2019

Mainly this is a three-day Adivasi Film Festival where we will screening selected films made by Adivasis. Mainly it is a three-day Indigenous film festival program centered on Adivasi visual stories (cinema) in which we will screening some of the selected Adivasi films. As a cultural act, it will be an annual festival of Adivasi films that defend humanity, advocates for the Adivasi creation, struggle and rights, and denounce the human rights violations.

Adivasi Film Festival 2019

ADIVASI CONTENT TRAVELERS

Internet is the most popular and widely accessible medium in terms of transactions, expansions and collections of information. Due to the device like mobile now it has already become more effective, and it has become a habit of every human's habit. But there is a lack of accurate and factual information, data, information and photos related to Indian Adivasis on the internet. Those who are, they present very wrong, misleading, factual and stereotype racial images of the Adivasis. Therefore, it is necessary to update the information related to the Adivasis on the internet and provide as much and correct and factual information as possible. The concept of Adivasi Content Travelers program has been envisaged keeping in mind this important need. The aim of this program is to provide maximum representation of the Adivasi information and the information available on the internet (like wikipedia, youtube and other social media) with the help of the community.


Seek wisdom, not knowledge. Knowledge is of the past, Wisdom is of the future.